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Friday, 18 January 2019

खबरों की पारदर्शिता ही पत्रकारिता की मूल आत्मा है - एसडीएम

नगर के पुरानी बाजार मोहल्ले के ओम शान्ति गली में स्थित "तहलका 24x7 न्यूज़" के कार्यालय का शुभ उद्घाटन मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी राजेश कुमार वर्मा एंव विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ संरक्षक सोशल मीडिया व पोर्टल जगत के भीष्म पितामह एस. एम. मासूम साहब ने फीता काटकर किया।

इस दौरान एसडीएम राजेश वर्मा ने कहा कि खबरों की पारदर्शिता ही पत्रकारिता की मूल आत्मा होती है। जिस दिन से मूल आत्मा धूल धूसरित होना शुरू होती है उस दिन से समाज भटकाव की राह पर चल निकलता है। सटीक व मजबूत खबर देने के लिए "तहलका 24x7 न्यूज़" टीम को बधाई देते हुए कामना करता हूँ कि "तहलका 24x7 न्यूज़" टीम अपनी बेब़ाक खबरों से सोशल मीडिया में एक नया आयाम स्थापित करेगा। "तहलका 24x7 न्यूज़" की खबरें समाज में एक ऐसा मुकाम हासिल करें कि "तहलका 24x7 न्यूज़" पर खबर चली है तो वह सही ही होगी। "तहलका 24x7 न्यूज़" प्रमाणिकता की कसौटी बनें।

वहीं सोशल मीडिया व पोर्टल जगत के भीष्म पितामह एस. एम. मासूम साहब ने एसडीएम श्री वर्मा जी से मन की बात बताते हुए कहा कि "तहलका 24x7 न्यूज़" की समूची टीम खबरों के प्रति संजीदा है तभी तो सवा साल पहले जब मेरी नज़र "तहलका 24x7 न्यूज़" पोर्टल पर पड़ी थी तो मुझे लगा कि "तहलका 24x7" टीम सही काम कर रही है लेकिन काम के हिसाब से सफलता नहीं मिल रही है। गत नवम्बर 2017 में  तहलका 24x7 के एडिटर रवि शंकर वर्मा से हमारी मुलाकात मेरे आवास हुई। दो घंटे की मुलाकात में रवि जी ने दिल में जो स्थान बनाया वह काबिले तारीफ है। "तहलका 24x7" के पेज को मैने डिजाइन किया। रवि जी ने मेरे दिशा निर्देश का बखूबी पालन किया। हिन्दुस्तान के साथ साथ अन्य 9 देशों के लोग भी "तहलका 24x7" के विजिटर्स है। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि रवि शंकर वर्मा ने अपनी मेहनत व जुनून से "तहलका 24x7" को इस मुकाम पर पहुंचा दिया कि आज उसके भव्य व व्यवस्थित कार्यालय के उद्घाटन का साक्षी बना हूँ। ईश्वर, रवि जी को शोहरत, ऐश्वर्य एवं सुख समृद्धि से नवाज़े।



वहीं तहलका 24x7 न्यूज़ के एडिटर रवि शंकर वर्मा ने बताया कि "तहलका 24x7" न्यूज़ पोर्टल गत 23 अप्रैल 2017 को लांच हुआ था और अक्टूबर 2017 तक महज 25 हजार विजिटर्स ही जुड़ पाए थे। नवम्बर 2017 में एस एम मासूम साहब जी की नजरों में आने के बाद मासूम सर ने मुझे दिशा निर्देश दिया जो "तहलका 24x7 न्यूज़" के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।  मुझे बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि पूरे पूर्वांचल मे चल रहे अधिकांश पोर्टलों के प्रेरणास्रोत मासूम साहब की नज़र "तहलका 24x7 न्यूज़" पर पड़ी और आज सवा साल बाद "तहलका 24x7 न्यूज़" के कुल विजिटर्स 10  लाख पार कर गये हैं।


इस अवसर पर प्राचार्य डॉ तबरेज आलम, प्रधानाचार्य शाहिद नईम, ओ पी सिंह, एख़लाक खान, गुलाम साबिर, पंकज कुमार सिंह, हसन मेंहदी, मो. आसिफ, फूल कुमार प्रजापति, सौरभ सेठ, परशुराम चौरसिया, बृजेश सेठ, साकिब खान, फैज़ान अंसारी, ज़ेया अनवर, राजेश चौबे, पप्पू भाई, प्रशांत अग्रहरि, सिद्धेश्वर पाण्डेय, अशोक यादव, श्याम जी गुप्ता, प्रमोद यादव पिन्टू, हनुमान प्रसाद गुप्ता, नौशाद मंसूरी, फहद खान, बसंत लाल जायसवाल, पूर्व सभासद अब्दुल खालिक, प्रमोद सिंह पिंटू, सतेन्द्र यादव, मिनहाज एराकी, अजय सिंह, हरिओम सहाय, धीरज सोनी, अजय कुमार राय, विवेक गुप्ता गोलू जी, मनोज सेठ, आनंद वर्मा, प्रीतम सिंह, इकरार खान, श्रीप्रकाश वर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Saturday, 15 September 2018

कमज़ोर की मदद करना चाहिए वो किसी भी धर्म का हो दाख्खिन पट्टी रन्नो के इमामबाड़े से बोले एस एम मासूम

 https://www.youtube.com/payameamn
  कमज़ोर की मदद करना चाहिए वो किसी भी धर्म का हो दाख्खिन पट्टी रन्नो के इमामबाड़े से बोले एस एम मासूम

जौनपुर :मुहर्रम के महीने में शोकसभाएं पैगम्बर ऐ इस्लाम हज़रत मुहम्मद ने नवासे और मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली के बेटे इमाम हुसैन की शहादत को याद करके मनाई जाती है | इस बार इस एम् मासूम अपने वतन जौनपुर में हैं और अलग अलग इमामबाड़ों से इमाम हुसैन का अमन का भाईचारे का पैगाम दुनिया तक पहुंचा रहे हैं | कभी बड़े इमाम गूलर घाट तो अभी कारंजा खुर्द तो कभी रन्नो |

मुहर्रम की तीसरी को दाख्खिन पट्टी रन्नो के इमामबाड़े  में शोक सभा (मजलिस ) हुयी जिसमे आस पास के साथ गांव के लोग थे | इस मजलिस  को ज़ाकिर ऐ अहलेबैत इतिहासकार और सोशल मीडिया के जानकार एस एम् मासूम ने खिताब किया और लोगों को बताया की दुनिया का हर इंसान जो कमज़ोर है चाहे किसी भी धर्म का हो इस्लाम कहता उस पे रहम करो उसकी मदद करो | जिस हुसैन ने प्यास की हालत में दुश्मन के साथ साथ उसके जानवरों को भी पानी पिलाया उसी हुसैन को कर्बला में तीन दिन का प्यासा शहीद किया गया |


मजलिस के बाद इमाम हुसैन के भाई हज़रात अब्बास का अलम और तुर्बत निकली और अंजुमनों ने नौहा मातम किया साथ में तबल की आवाज़ से हुसैनी पैगाम की विजय का ऐलान हुआ |
 https://www.youtube.com/payameamn

Thursday, 31 May 2018

पत्रकारिता दिवस पे ख़ास वेब पे और सशक्त प्लेटफॉर्म की तलाश करें एस एम् मासूम

इंटरनेट से पत्रकारिता को मिला नया आयाम जैसी गोष्ठियां आज जौनपुर जैसे शहर में होने लगी हैं जिसे देख के बड़ी ख़ुशी हुआ करती है | ख़ुशी इस लिए भी होती है की जौनपुर के लोग मुझमे उस शख्स को देखते हैं जिसने जौनपुर के पत्रकारों को वेब न्यूज़ पोर्टल के प्रति जागरूक किया और जब कुछ पत्रकारों ने इसी कामयाबी के साथ अपनाया तो मुझे जौनपुर में वेब न्यूज़ पोर्टल के जनक और भीष्म पितामह जैसी पहचान मिली | अब इस पत्रकारिता दिवस पे मैं ही अपनी क़लम न चलाउ तो यह ना इंसाफ़ी होगी | 

अभी सात आठ वर्ष पहले की बात है की वेब न्यूज़ पत्रकारिता के प्रति यहां के पत्रकार जागरूक नहीं थे | मैंने २०११ से यह कोशिश शुरू कर दी की यहां के पत्रकारों को जा जा के बताता था की वेब न्यूज़ पोर्टल अगर चलाओगे तो आज़ाद पत्रकार की हैसियत से पहचाने जाओगे और इसी में रोज़गार के नए  अवसर मिलेंगे | यह वो दौर था की मेरे जागरूक करने पे अक्सर लोग यह सोंचते थे की मैं कुछ ऐसा करने को कह रहा हूँ जिसमे मेरा फायदा होगा इसलिए लोग इज़्ज़त देते और सुन लेते लेकिन फिर भूल जाते |  मैंने २०१२ में जागरूक करने के लिए एक पत्रकार का वेबपोर्टल मुफ्त में बना के दिया जो  आज भी चल रहा है लेकिन वो उसे उस तरह से नहीं चला सके की वो कोई अपनी पहचान बना पाता | 

लेकिन २०१३ में  एक दिन जौनपुर पत्रकार जगत के गुरु  कहे जाने वाले पत्रकार राजेश श्रीवास्तव से मुलाक़ात हो गयी और ये पहले पत्रकार थे जिन्होंने वेब न्यूज़ पत्रकारिता की अहमियत को पहचाना और इसी के साथ मेरी वेबसाइट बनाने की और अंतरजाल पे फैलाने की तकनीकी जानकारी और राजेश श्रीवास्तव की पत्रकारिता ने जौनपुर को पहला कामयाब वेब न्यूज़ पोर्टल शीराज़ ऐ हिन्द डॉट कॉम दिया और मुझे वेब न्यूज़ पत्रकारिता के जनक और भीष्म पितामह जैसी पहचान मिली | आज भी ये  न्यूज़ पोर्टल  जौनपुर का सबसे तेज़ और अधिक पढा  जाने वाला न्यूज़ पोर्टल है | .राजेश श्रीवास्तव की कामयाबी को देखते ही मेरे पास अनगिनत फ़ोन आने लगे और हर पत्रकार इस बात को लेकर बेहद उत्साहित दिखने लगा की उसका भी अपना वेबपोर्टल बने लेकिन इस न्यूज़ वेब पोर्टल को चलाने के लिए तकनीकी जानकारी और इसे अंतरजाल पे तेज़ी से फैलाने की कला आनी चाहिए और पत्रकारिता के उसूल की जानकारी के साथ साथ क़लम में  ताक़त भी होनी  चाहिए |   

इसके बाद मैंने बहुत से वेबपोर्टल बनाय और अब तक जौनपुर आस पास में लगभग ३८-४० पोर्टल बनाय जिनमे से कुछ बंद हुए कुछ कामयाबी से चल भी रहे हैं | जैसे रवि शंकर वर्मा और आरिफ हुसैनी के न्यूज़ पोर्टल | इसके बाद तो लोगों में वेब पोर्टल बनाने की तकनीकी जानकारी हासिल करने और अपना पोर्टल बनाने की होड़ सी लग गयी और बहुत से पत्रकारों ने अपनी सुविधा अनुसार खुद से या किसी दुसरे के सहयोग से वेब पोर्टल भी बनाने शुरू किये जो आज भी कामयाबी के साथ चल रहे है जिसमे अंकित,कमर हसनैन दीपू, ,दीपक सिंह इत्यादि बहुत से नाम हैं | 

जौनपुर में जब वेब पत्रकारिता पे कोई गोष्टी होती हो और जौनपुर में वेब न्यूज़ पत्रकारिता का जन्म कब और कैसे हुआ और किन किन लोगों की मेहनत ने पत्रकारिता को विश्व की तरह जौनपुर में एक पहचान दी इसकी चर्चा यदि न हो तो इसे ना इंसाफ़ी कहा जायगा | गोष्टीयो का मक़सद केवल चर्चा तक सीमित ना रहे बल्कि पत्रकारों को प्रोत्साहित ही करता रहे तो उचित होगा |

वेब न्यूज़ पत्रकारिता जौनपुर में अभी अपनी युवा अवस्था तक भी नहीं पहुंची है और पत्रकार इतनी कामयाबी में ही सतुष्ट नज़र आने लगे हैं यह देख के थोड़ा दुःख अवश्य होता है लेकिन साथ साथ आशा भी है की समय इनको आगे बढ़ने की राह खुद देता चला जायगा | मैं यह नहीं चाहता की जैसे वेब न्यूज़ पत्रकारिता को जौनपुर आने में दुनिया के मुक़ाबले में १० वर्ष लग गए उसी तरह इसे जवान होने में भी समय लगे | 

जो लोग वेब न्यूज़ पोर्टल जौनपुर में चला रहे हैं उन्हें चाहिए और वेब पे और सशक्त प्लेटफॉर्म की तलाश करें और केवल सोशल मीडिया पे शेयर करने तक सीमित ना रहे और हर दिन ख़बरों के कॉपी पेस्ट से अलग अपनी क़लम का जादू दिखाते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाते रहे वरना वेब न्यूज़ पोर्टल की भीड़ में एक दिन  खो जाएंगे | 

...........एस एम् मासूम 
S.M.Masoom
Cont:9452060283

Tuesday, 3 October 2017

अखरता है जौनपुर में रोजगार का अभाव: एस.एम.मासूम

अखरता है जौनपुर में रोजगार का अभाव: एस.एम.मासूम

एस.एम.मासूम बोले, प्रतिभाओं की कमी नहीं लेकिन अवसर तलाशने के लिए पलायन करने को मजबूर


जौनपुर। एस.एम मासूम के नाम का कहीं भी जिक्र होते ही एक सहज, सरल और मिलनसार जाने-माने ब्लागर, इतिहासकार, पत्रकार और सोशल मीडिया का जानकार ही नहीं, उसकी तकनीक पर गहरी पकड़ रखने वाला शख्स जेहन पर हावी हो जाता है। मुंबई को अपनी कर्मभूमि बना चुके एसएम मासूूम इन दिनों मोहर्रम के सिलसिले में गृह जनपद आए हुए हैं। उन्हें मलाल इस बात का है कि शर्की राज्य में एक सदी तक राजधानी रहे ऐतिहासिक शहर जौनपुर में रोजगार का अभाव है। कोई भी क्षेत्र हो प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन अवसर के अभाव में उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में इन प्रतिभाओं का पूरा फायदा जौनपुर को नहीं मिल पाता।

शर्की काल से पहले 14 वीं सदी में अपने कुनबे के साथ जौनपुर में आए सैय्यद अली दाउद के वंशज करीब ढाई सौ साल पहले पानदरीबा में आकर बस गए। उसी घराने से ताल्लुक रखते हैं सैय्यद मोहम्मद मासूम। सैय्यद अली दाउद की कब्र शहर में मोहम्मद हसन इंटर कालेज के पीछे आज भी मौजूद है जिसकी देखरेख और चादरपोशी आस-पास की बस्ती के हिंदू पविार करते हैं।

उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद करीब तीन दशक पहले रोजी-रोटी के सिलसिले में मायानगरी मुंबई जाकर उसे अपनी कर्मभूमि बना लेने वाले एसएम मासूम का अपनी माटी से कितना गहरा लगाव है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल में दो-चार बार दो-चार दिन का भी मौका मिलने पर फुरसत के पल बिताने जौनपुर आ जाते हैं। उनके आवास के किसी जमाने में आलीशान कोठी रहे होने की तस्दीक उसका जर्रा-जर्रा करता है। वहीं आज प्रभात से बातचीत में उन्होंने कहा कि वतन की अहमियत का एहसास किसी को भी तब होता है जब वह उससे दूर चला जाता है। जौनपुर की और पौराणिक और ऐतिहासिक विरासतों और यहां की प्रतिभाओं से देश-दुनिया को वाकिफ कराने का ख्याल दिल-ओ-दिमाग में आया तो वे इसके लिए प्रतिबद्ध हो गए। सन 2010 में एसएम मासूम ने अपना वेब पोर्टल हमारा जौनपुर डॉट कॉम ऑनलाइन किया। इसके जरिए यहां के पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों और इमारतों के साथ-साथ  प्रतिभाओं से पूरी दुनिया को परिचित कराते हुए जौनपुर का गौरव बढ़ाया।


इस प्रयास में आज भी वह पूरी लगन से जुटे हुए हैं। उन्हें यूं ही जौनपुर के सोशल मीडिया के न्यूज पोर्टल का भीष्म पितामह नहीं कहा जाता। उन्होंने जौनपुर के मीडिया जगत के लोगों को न्यूज पोर्टल की न सिर्फ अहमियत बताई बल्कि उससे रू-ब-रू कराने के लिए अपना कीमती समय देकर कई पत्रकारों को खुद पोर्टल बना कर दिए। जौनपुर को नाज है उसके इतिहास और वर्तमान से दुनिया को हमेशा परिचित कराते रहने वाले अद्भुत प्रतिभा के धनी एसएम मासूम पर।


Saturday, 23 September 2017

जौनपुर इमामबाड़ा बड़े इमाम से मुहर्रम की शोक सभाएं शुरू |

इस्लाम अमन और शांति का पैगाम देता है | 


जब मुहर्रम आता है हुसैन को चाहने वाले अलम ताजिया लिए नौहा मातम करते पूरी दुनिया में दिखने लगते हैं | यह अपने अपमे एक चमत्कार है की कर्बला का वाकेया जहां पैगम्बर ऐ इस्लाम हजरत मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को ज़ालिम यजीद की फ़ौज ने शहीद किया इसे आज १380 हो चुके है फिर भी इमाम हुसैन  के चाहने वाले इसे ऐसे मनाते है जैसे यह अभी कल की ही बात हो |

इमाम हुसैन (अ.स) का ग़म जौनपुर में बड़े जोश से मनाया जाता है जिसमे हिन्दू मुसलमान शिया सुन्नी सभी शामिल हुआ करते हैं | शिया मुसलमान अपने घरों में अपने इमामबाड़ों में चाँद रात को ही ताजिया आलम सजा देते हैं और दस दिनों तक मजलिसें (शोक सभाएं ) किया करते हैं |

इस वर्ष हर साल की तरह गूलर घाट स्थित इमामबाड़ा बड़े इमाम में जनाब जीशान जैदी साहब ने शोक सभाएं (मजलिस ) आयोजित किया जिसमे जौनपुर के मशहूर इतिहासकार ,ब्लॉगर और इस्लाम के जानकार एस एम् मासूम अपने विचार पेश कर रहे हैं | आज पहली मुहर्रम को जनाब एस एम् मासूम साहब ने बताया हम शोक सभाएं इसलिए मनाते हैं की दुनिया को हम बता सकें की इस्लाम में ज़ुल्म करने वाला यजीद कहलाता है जो चाहे खुद को खलीफा कहे लेकिन मुसलमान उसे नहीं मानते बल्कि कह लें की धिक्कारते हैं |


इस्लाम अमन और शांति का पैगाम देता है और इसमें हथियार केवल अपनी हिफाज़त के लिए उठाया जा सकता है आगे बढ़ के किसी पे हमला नहीं किया जा सकता | इसी लिए हमारे इमामबाड़ों में हर कौम हर धर्म के लोगों को बुलाया जाता है और उन्हें भाईचारे का पैगाम दिया जाता है | इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसमे पडोसी चाहे वो किसी भी धर्म का हो भूखा हो तो उसे खिलाय बिना खुद नहीं खा सकता मुसलमान |


मुसलमानों ने पहली मुहर्रम को जो ताजिया सजाया था  उसे तो 10 मुहर्रम जिसे आशूरा भी कहते हैं ,के दिन दफन कर दिया जाता है लेकिन दो महीने आठ दिन तक यह इमाम हुसैन का दुःख मनाया जाता है  | इन दिनों में मुसलमान काले कपडे पहने दुनिया के  हर देश की तरह जौनपुर में भी नज़र आयेगे| जगह जहग शब्बेदारी, जुलुस अज़ादारी ,मजलिस का सिलसिला इन दो महीने आठ दिन तक चलता रहता है जिसमे बहुत से ख़ास दिन जैसे आशूरा, इमाम का दसवां, चौबीसवां,चालीसवां,28 सफ़र इत्यादि ख़ास होते हैं |

एस एम् मासूम इस इमामबाड़े से अमन का ,भाईचारे का ,इंसानियत का पैगाम पूरे सप्ताह हर दिन देंगे और ज़ालिम यजीद ने जो ज़ुल्म इस्लाम के पैगम्बर हजरत मुहम्मद पे किये उसे दुनिया तक पहुंचाएंगे जिस से समाज में अमन और शांति कायम रहे |

धर्म दर्शन

 
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